बुआ की बेटी को गुलाम बनाया

हैल्लो दोस्तों, आज में आप लोगों को अपनी कहानी सुनाना चाहता हूँ. इस कहानी की हिरोइन बहुत ही सेक्सी बॉम्ब है. ये बात तब की है जब में 21 साल का था. में दिल्ली में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता था. मैंने जहाँ कमरा ले रखा था, उसी के पास मेरी बुआ की दो लड़कियों का मकान था. में अकेला ही रहता था इसलिए उनके पास ही मेरा ज्यादा टाईम पास होता था. छोटी बहन (बुआ की लड़की बहन ही होती है) मुझसे 7 साल बड़ी है.

उन दिनों उसकी उम्र 28 साल थी, लेकिन वो 22 साल की लगती थी, उसके दो बच्चे भी थे, उसका कद 5 फुट 5 इंच, मासल शरीर, वो भी ऐसी कि भगवान ने चुन-चुनकर कारीगरी की हो और उस पर उसका 36-24-38 साईज का फिगर था. उसकी गांड आपस में रगड़ खाती थी और जब वो चलती तो मनचले कहते थे कि इसकी गांड पर 1 रूपए का सिक्का रख दो तो नहीं गिरेगा, उसका रंग गोरा था, तो यह हुआ उसका फिगर.

उन दिनों वी.सी.आर किराए पर लाकर फिल्म देखते थे. फिर एक दिन में भी वी.सी.आर किराए पर ले आया और उसके साथ एक ब्लू फिल्म भी लेकर आया था. मुझे ब्लू फिल्म बहुत अच्छी लगती थी, जब गर्मियों के दिन थे और जून का महीना था.

हमने शाम को (में, दोनों बहनें और उनके बच्चे, दोनों जीजा जी ही बाहर नौकरी करते है तो वो नहीं थे) फिर हम सबने करीब रात के 2 बजे तक फिल्म देखी और उसके बाद सभी सोने के लिए अपने-अपने अपने कमरे में चले गये और में वही अपनी ब्लू फिल्म देखने लगा, तो ब्लू फिल्म देखते समय मुझे गर्मी चढ़ने लगी और मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और सोफे पर बैठ गया.

अब मेरा 9 इंच का लंड मेरी टांगो के बीच में तना खड़ा था. फिर जब मुझसे ब्लू फिल्म देखते-देखते अपने आप पर काबू नहीं हुआ तो मैंने मुठ मार ली. अब ये सब (कला) मेरी छोटी बहन देख रही थी, तो मैंने ध्यान नहीं दिया. अब उसको कमरे में से सब कुछ साफ-साफ दिखाई दे रहा था (जो उसने मुझे अगले दिन बताया था) और फिर में मूठ मारकर सो गया.

सुबह 8 बजे कला मुझे जगाने आई और बड़े ही प्यार से मेरी गर्दन पर अपना हाथ फैरकर उठाया, जैसे कोई बीवी अपने पति को जगाती है. उस टाईम उसने नाइटी ही पहनी हुई थी. अब कला मुझे जगाने के लिए झुकी हुई थी कि मेरी आँखे खुलते ही मुझे उसके बूब्स के पूरे–पूरे दर्शन हो गये. मैंने उसके बूब्स सीधे तौर पर पहली बार देखे थे, में पहले तो उसके कपड़ो में देखकर ही सोचा करता था कि उसके बूब्स कैसे होगें? लेकिन आज तो उसकी नाइटी के ढीले गले में से सब कुछ दिखाई दे रहा था.

फिर मुझको जगाने के बाद कला ने एक अंगड़ाई ली, जो बड़ी ही कातिल थी और मेरी आँखो में अपनी आँखे डालकर कहा कि राजा जी रात को अकेले नहीं जगा करते और मुस्कुराकर चली गई. फिर मुझे उसका बर्ताव बड़ा ही अजीब लगा और मेरा पूरा दिन ऐसे ही मस्ती में कट गया. अब अगले रोज से गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो रही थी, तो मेरी बड़ी बहन अपने बच्चों के साथ अपने मायके आ गई.

अब घर पर में और कला ही रह गये थे. फिर हमने रात को करीब 10 बजे तक टी.वी देखी और फिर अपने-अपने कमरे में सोने चले गये. तो 15-20 मिनट के बाद कला वही नाइटी पहने हुए मेरे कमरे में आई और कहा कि में भी इसी कमरे में सोऊँगी. फिर मैंने कहा कि यहाँ तो एक ही चारपाई है तो तुम यहाँ कैसे सो सकती हो? तो उसने कहा कि में दूसरी तरफ अपना सिर करके सो जाऊंगी, तो उसके ज़िद करने पर मैंने हाँ कर दी और वो वहीं लेट गई.

फिर थोड़ी देर तक तो वो अपने पैर सीधे पसार कर सोती रही, लेकिन बाद में उसने अपने घुटनों को मोड़ लिया. अब कला की नाइटी इस तरह हो गई थी कि मुझे उसकी चूत तक सब कुछ दिखाई दे रहा था, तब कला ने अंडरवेयर नहीं पहनी थी. अब मुझे उसकी मासल टांगो के बीच से उसकी प्यारी-प्यारी गुलाबी चूत के दर्शन हो रहे थे, उसकी चूत शेव्ड थी, उसने उसी दिन उसकी चूत की झाटें काटी थी, उसकी चूत की दोनों फांके मोटी-मोटी थी. अब ये सब नज़ारा देखकर मेरा लंड भी तन गया था और फटने को हो गया था.

अब उसकी चूत मुझे निमंत्रण देती लग रही थी कि मर्द है तो मुझे फाड़ डाल और मेरा लंड कहा रहा था कि ऐसी रसीली चूत आज नहीं लेगा तो फिर नहीं कभी मिलेगी. मैंने पता नहीं कला की चाल ढाल देखकर कितनी बार उसे ख्यालों में चोदा था? और आज वही चूत मेरे सामने निवस्त्र थी. अब मेरा दिल कहता कि ऐसा हुस्न है कि जो चोदे उसे स्वर्ग मिल जाए और मेरा दिमाग कहता कि नहीं बहन को नहीं चोदते, लेकिन होनी को कौन टाल सकता है? तो मेरा दिल जीत गया.

फिर मैंने उठकर देखा तो मुझे लगा कि कला गहरी नींद में सो रही थी, तो मैंने वापस लेटकर अपना एक हाथ कला की चूत पर रख दिया और उसके जवाब का इंतजार करने लगा. उसकी चूत एकदम चिकनी और मोटी थी. अब अपना हाथ रखते ही मुझे बड़ा सकून मिल रहा था. फिर करीब 3-4 मिनट के बाद कला ने अपना हाथ इस तरह से मेरे लंड पर रख दिया जैसे कोई नींद में रखता है, लेकिन अब में समझ गया था कि वो भी चुदना चाहती है, तो उसके हाथ रखने से मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने मेरी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी.

फिर मेरी उंगली उसकी चूत के अंदर जाते ही उसने अपने दोनों पैरो को थोड़ा सा और चौड़ा कर दिया, तो में समझ गया कि रास्ता साफ है. फिर उसने भी मेरी लुंगी के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया, तो मैंने 3-4 बार अपनी उंगली उसकी चूत में हिलाई, तो कला ने एक सिसकारी ली और अपने एक हाथ को मेरी लुंगी में डालकर मेरे लंड को हिलाया.

अब भी उसकी आँखे बंद थी, तो में उठा और मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए, तो मेरे होंठ रखते ही वो मेरे होंठो को चूसने लगी. फिर मैंने कहा कि अपनी आँखे खोलो डार्लिंग, तो कला ने कहा कि नहीं मुझे भाई से आँखे मिलाने में शर्म आती है, में ये सब नहीं कर सकती. फिर मैंने कहा कि अब ये भूल जा कि हम भाई बहन है, तू बस ये याद रख कि में तेरा यार हूँ.

उसने धीरे-धीरे अपनी आँखे खोली और मेरे होंठो को फिर से चूमने लगी. फिर मैंने उसकी नाइटी को निकाल दिया और खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया.

फिर कला कहने लगी कि में कब से इस लंड के दीदार को तरस रही थी? उसने 1-2 बार मुझे नहाते देखा, तो वो गर्म हो जाती थी, लेकिन अपने मन को समझा लेती थी, लेकिन कल जब तुम रात को मुठ मार रहे थे, तो मैंने तुम्हारा पूरा टाईट लंड देखा और तभी से मेरा अपने आप पर काबू नहीं रहा तो मैंने सोचा कि तेरे तो जीजा बाहर रहते है और में जलती हूँ और उधर तुम मुठ मारकर काम चलाते हो. अगर हम दोनों मिल जाए तो हम दोनों की मौज हो जाएगी और किसी को कुछ पता भी नहीं चलेगा.

फिर मैंने कहा कि बड़ी बहन को पता चल जाएगा, तो उसने कहा कि तुम चिंता मत करो किसी दिन मौका देखकर उसको भी तुमसे चुदवा दूँगी और फिर उसके बाद हम मौज किया करेंगे. अब हम दोनों ही नंगे थे, उसका नंगा फिगर भी बड़ा मस्त था. फिर कला उठी और जमीन पर बैठकर मेरा लंड चूसने लगी और में अपने दोनों हाथों से उसकी चूचीयों को भींचने लगा, तो वो एक बार में मेरा आधा लंड अपने मुँह में ले जाती थी.

थोड़ी देर के बाद मैंने उसे उठया और बेड पर लेटा दिया और उसकी चूचीयों को चूसने लगा, तो वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी लेने लगी. अब में उसकी चूचीयों को चूसते-चूसते उसकी चूत को भी छेड़ रहा था. अब उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था और अब उसकी चूत बहुत चिकनी हो गई थी. फिर मेरा दिल भी कर गया कि क्यों ना इसकी चूत चाटी जाए? तो मैंने उसकी दोनों टाँगे ऊपर उठाई, तो उसकी चूत एकदम अलग से निकल आई.

फिर मैंने उसकी प्यारी चूत पर जैसे ही अपनी जीभ रखी तो उसने ज़ोर-ज़ोर से सिसकारी लेनी शुरू कर दी. अब में जैसे-जैसे उसकी चूत को चाटता तो वो अपनी गांड को मजे-मजे में और ऊपर उठाती और कहा कि में भी कितनी बेवकूफ़ थी, इतना मस्त मर्द मेरे पास था और में ऐसे ही तड़पती थी. अब मुझसे भी सब्र नहीं हो रहा था तो में उठा और उसकी मस्तानी चूत पर अपना लंड रख दिया, तो मेरे लंड को उसकी चूत बहुत गर्म लगी और उसकी चूत को मेरा लंड बहुत गर्म लगा.

मैंने थोड़ा सा ज़ोर लगाकर दो झटको में ही मेरा पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और मेरे लंड के अंदर जाते ही उसने ज़ोर की सिसकारी ली और कहा कि हाए मेरे राजा आज इस चूत को पूरी फाड़ डाल, ये कला हमेशा तेरी गुलाम बनकर रहेगी, तू रोज इस मस्त चूत की आग बुझाया कर. फिर मैंने कहा कि मेरी रानी में कितने दिनों से तुझे चोदना चाहता था? आज में मेरी सारी हसरतें पूरी करुँगा. फिर मैंने कला को उस रात बहुत स्टाइल में चोदा और आज भी हम दोनों अपनी चुदाई के भरपूर मजे लेते है.