भाभी मेरे सामने घोड़ी बन गई

दोस्तों आज में आप सभी को अपनी भी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ और यह मेरी अपनी खुद की पहली कहानी है और यह घटना मेरे साथ करीब एक साल पहले घटित हुई थी, जिसको में अब लिख रहा हूँ. दोस्तों में बता दूँ कि में इस कहानी को लिखने में कुछ गंदे शब्द भी लिख रहा हूँ, लेकिन वो सिर्फ़ कहानी को मजेदार बनाने के लिए है. यह हमारी चुदाई की बात मुझे और मेरी भाभी को ही पता है और घर में सब लोग हमारी इस चुदाई हमारे नये रिश्ते से बिल्कुल अंजान है.

यह चुदाई मेरी भाभी के साथ हुई जिसके बाद उन्होंने भी मेरे साथ सेक्सी कहानियों को पढना सेक्सी फिल्म देखना मेरे साथ शुरू किया और आज उन्ही के कहने पर यह कहानी आप तक पहुंची है और अब में आप सभी को मेरी भाभी के बारे में भी बता देता हूँ. दोस्तों मेरे भैया की शादी अभी दो साल पहले ही हुई है और मेरी भाभी का नाम अर्चना जैन है.

मेरी भाभी बहुत ही गोरी, सेक्सी, गोरी, पतली है, उनका फिगर उन्होंने बहुत सम्भालकर रखा और उनका स्वभाव शुरू से ही मेरे घर वालों को बड़ा अच्छा लगा और वो हमेशा मुझसे हंस हंसकर बातें किया करती थी और में भी उनसे खुलकर हंसी मजाक बातें करता था. दोस्तों मेरे भैया एक प्राइवेट कंपनी में मुम्बई में सी. ए. की नौकरी करते है, इसलिए वो हमारे घर पर कभी कभी आते है, जिसकी वजह से भाभी की चूत अपनी चुदाई के लिए तरस रही थी, वो अपनी चूत की खुजली को अब कैसे भी कम करना चाहती थी और यह सभी बातें मुझे उनकी चुदाई के बाद उन्ही से पता चली.

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अब में भाभी को देख देखकर तो जैसे पागल हुआ जा रहा था और किसी ना किसी तरह भाभी को छूने की कोशिश करता रहा, वो जब मेरे कमरे में झाड़ू लगाने आती तो जैसे ही वो नीचे झुकती तो मेरा ध्यान सीधा उनके ब्लाउज के अंदर से लटकते झूलते हुए बूब्स पर चला जाता और में देखकर सोचने लगता, वाह क्या गजब के बूब्स है? मेरा मन करता था कि में उनको पकड़कर मसल दूँ, लेकिन में तो सिर्फ़ उन्हें देख ही सकता था और उनको छूकर मज़े मस्ती करने के बारे में बस में सपने ही देखा करता था और वैसे भाभी और मुझमें बहुत ही अच्छी बनती थी, हम दोनों एक दूसरे से बहुत बार हंसी मजाक भी कर लेते थे, लेकिन कभी भी घर में हम दोनों अकेले नहीं होते थे, हमेशा हमारे साथ कोई ना कोई रहता था और में मन ही मन सोचता था कि काश एक दिन में और भाभी अकेले रहे तो शायद कुछ बात बने, लेकिन फिर एक दिन मेरी अच्छी किस्मत ने मुझे वो मज़ा दे ही दिया और उस सपने को पूरा कर ही दिया, जिसको में हमेशा देखा करता था.

दोस्तों वो सर्दियों का मौसम था, जब मेरी किस्मत ने मेरा साथ दिया और मेरे घर के सभी सदस्यों को हमारे एक करीबी रिश्तेदार की शादी में चेन्नई जाना था. भैया तो घर पर रहते नहीं थे, इसलिए घर पर मेरी मम्मी, पापा, में और मेरी भाभी ही रहती थी. फिर पापा ने पूछा कि शादी में कौन कौन जा रहा है? तब मैंने उनसे कहा कि मेरे तो पेपर बहुत करीब आ रहे है, इसलिए में तो अपनी पढ़ाई की वजह से उस शादी में नहीं जा सकता, आप ही सोचो और चले जाओ.

तभी मम्मी कहने लगी कि चलो ठीक है, इसके पेपर है तो यह यहीं पर रहेगा, लेकिन इसके खाने के समस्या भी तो रहेगी. तभी में इतने में बीच में बोल पड़ा कि भाभी और में यहीं पर रह जाएँगे, जिससे मेरे खाने के अलावा और भी कामों की समस्या भाभी के मेरे पास रहने से खत्म हो जाएगी और हमारे साथ में रहने से आप दोनों को हमारी तरफ से कोई भी चिंता नहीं होगी, इसलिए आप दोनों ही उस शादी में चले जाओ. दोस्तों मेरा प्लान वो विचार घर पर सभी को एकदम सही लगा. मम्मी पापा ने कहा कि हाँ ठीक है हम दोनों शादी में चले जाते है और तुम दोनों यहाँ पर रुककर अपना खुद का और घर का भी ध्यान रखना.

उसके अगले दिन में सुबह जल्दी उठकर हंसी ख़ुशी अपनी मम्मी और पापा को ट्रेन में बैठाकर तुरंत बड़ा खुश होकर अपने घर पर आ गया और अब घर पर में और मेरी भाभी ही थी. भाभी ने आज गुलाबी रंग की साड़ी और उसी रंग का ब्लाउज पहन रखा था, वो ब्लाउज थोड़ा पतले कपड़े का था, इसलिए उसमें से भाभी की ब्रा जो कि क्रीम कलर की थी, वो मुझे साफ साफ दिख रही थी, में तो उनके गोरे सेक्सी बदन को देखकर बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पा रहा था, लेकिन में अपनी तरफ से भाभी से कहता भी तो क्या?

फिर में अपने कामों में लग गया और मेरे घर पर पहुंचने के कुछ देर बाद भाभी मुझसे बोली कि धन्यवाद देवर जी, तो मैंने उनके मुहं से वो शब्द सुनकर चकित होकर तुरंत उनसे पूछा कि वो किस बात के लिए? तब भाभी ने कहा कि मेरा भी उस शादी में जाने का बिल्कुल भी मन नहीं था, अगर आपकी पढ़ाई खराब ना हो तो क्या आज हम दोनों कोई फिल्म देखने चले?

मैंने उनके मुहं से वो बात सुनकर बहुत खुश होकर झट से कहा कि हाँ चलो, नेक काम में देर किस बात की? लेकिन यार अभी कोई भी अच्छी फिल्म तो लग ही नहीं रही है, सिर्फ़ एक फिल्म मर्डर ही लगी हुई है. फिर भाभी बोली कि हाँ चलो आज हम वो फिल्म ही देखने चलते है, उनके में से हाँ सुनकर में एकदम चकित हो गया और भाभी तो मुझसे हाँ कहकर तुरंत ही अपने कमरे में कपड़े बदलने चली गई. उन्होंने मुझे कुछ कहने सुनने का मौका ही नहीं दिया और जब वो वापस आई तो मैंने देखा कि उन्होंने एक गहरे गले का बिना बाहँ का ब्लाउज पहना हुआ था, जिसकी वजह से मुझे उनकी ब्रा और बूब्स के दर्शन हो रहे थे.

मैंने पास आते ही उनसे कहा कि भाभी आप इन कपड़ो में बहुत ही सुंदर हॉट लग रही हो. फिर भाभी मुस्कुराकर मुझसे कहने लगी कि मेरी इतनी तारीफ करने के लिए बहुत धन्यवाद. फिर उसके बाद हम दोनों सिनेमा हॉल पहुंच गये और हमे मेरी अच्छी किस्मत से सीट भी सबसे ऊपर कोने में मिली थी और जब वो फिल्म शुरू हुई तो उसके सेक्सी द्रश्य को देखकर मेरा लंड तो बिल्कुल भी मेरे काबू में ही नहीं रहा.

तभी कुछ देर बाद उसमें अचानक से मल्लिका का कपड़े उतारने वाला वो सेक्सी सीन आ गया और अब में देख रहा था कि उसको देखकर भाभी के मुहं से अब गरम होने की वजह से सिसकियाँ निकलनी शुरू हो गई थी और भाभी ज्यादा जोश में आकर अब मेरा हाथ पकड़कर मसलने लगी, जिसकी वजह से मेरी भी हिम्मत अब बढ़ गई.

मैंने भी आगे बढ़ते हुए भाभी के कंधे पर अपना एक हाथ रख दिया और में धीरे धीरे मसलने लगा था और उस समय हॉल में बिल्कुल अंधेरा था और मेरा हाथ आगे बढ़कर अब धीरे धीरे भाभी के बूब्स पर आ गया, लेकिन फिर भी भाभी ने मुझसे कुछ भी नहीं कहा, वो तो फिल्म का मज़ा ले रही थी और अब में भाभी के बूब्स को मसल रहा था और फिर मैंने उनके ब्लाउज में अपना एक हाथ डाल दिया और भाभी सिर्फ़ सिसकियाँ भरती रही और मेरे साथ मज़े करती रही. अब फिल्म खत्म हो चुकी थी और हम दोनों अपने घर पर आ गए और घर पर पहुंचकर मैंने उनसे पूछा क्यों भाभी कैसी लगी फिल्म? तो भाभी बोली कि बहुत अच्छी लगी.

फिर मैंने कहा कि भाभी अब मुझे बहुत ज़ोर से भूख लगी है और वो रसोई में खाना लेने चली गई, हम दोनों ने एक साथ में बैठकर खाना खाया. उसके बाद में अपने कमरे में चला गया और इतने में भाभी की आवाज़ आई, क्यों वहां पर क्या कर रहे हो देवर जी ज़रा इधर तो आओ ना. अब में उनकी आवाज को सुनकर भाभी के बेडरूम में चला गया.

भाभी बोली कि देखो जरा यह मेरी ब्रा का हुक मेरे बालों में कहीं अटक गया है, प्लीज आप इसको निकाल दो ना. दोस्तों मैंने देखा कि उस समय भाभी सिर्फ़ ब्रा पेटीकोट में थी और में पहली बार वो सेक्सी नजारा देखकर बहुत चकित था, क्योंकि मुझे कभी भी उम्मीद नहीं थी कि वो कभी मुझे इस रूप में भी नजर आएगी, लेकिन वो सब उस भगवान का मेरे ऊपर आशीर्वाद था. दोस्तों मेरी भाभी ने उस समय क्रीम कलर की ब्रा पहन रखी थी और बहुत ही आकर्षक दिख रही थी और में उनको देखकर बिल्कुल पागल हो चुका था, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि कमरे के अंदर वो इस काम के लिए मेरा इंतजार कर रही है, वरना में कभी का उनके पास बिना बुलाए ही चला जाता.

फिर मैंने मुस्कुराते हुए हाँ करके उनकी ब्रा को खोलने के बहाने अपनी भाभी के तने हुए निप्पल को भी मसल दिया और उनकी गोरी पीठ पर भी अपना एक हाथ फेर दिया. उसके बाद मैंने उनसे कहा कि लो भाभी खुल गयी आपकी ब्रा और इतना कहकर मैंने उनकी खुली हुई ब्रा को एक झटके से नीचे गिरा दिया, जिसकी वजह से अब भाभी ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी और में एकदम चकित होकर उनकी गोरी उभरी, लेकिन अब झूलती हुई छाती उसके ऊपर हल्के भूरे रंग के तने हुए निप्पल को घूर घूरकर देखता रहा.

अब हम दोनों पूरे गरम हो चुके थे और अब भाभी मेरी तरफ हंसते हुए कहने लगी कि देवर जी अगर आपको अब भी भूख लगी है तो आप दूध पी लो. अब उनके मुहं से यह बात सुनकर मैंने बिना देर किए तुरंत उनको अपनी गोद में भाभी को उठा लिया और उन्हें बिस्तर पर ले गया और जहाँ पर जाते ही मैंने उनको सीधा लेटा दिया और उनके पेटीकोट भी तुरंत खोलकर नीचे उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने पूरी नंगी हो चुकी थी और मैंने भी अपने कपड़े उतारे, जिससे में भी उनके सामने अब पूरा नंगा था.

अब मैंने शुरुआत ऊपर से ही करना एकदम ठीक समझा और फिर मैंने भाभी के लाल लिपस्टिक लगे रसीले होंठो को मैंने जमकर चूसा. उसके बाद बारी आई उनकी छाती की जिस पर कि उनके दो मोटे मोटे दूध से भरी टंकिया लगी हुई थी और उनके निप्पल का सबसे आगे का हिस्सा बिल्कुल भूरा था, जो अब तनकर खड़ा था. मैंने भाभी के बूब्स को इतना ज़ोर से जमकर दबाया और चूसा कि सच में ही उनसे अब हल्का सा दूध बाहर निकल आया.

मैंने उनके दोनों बूब्स का जमकर आनंद लिया और भाभी के मुहं से तो बस सिसकियाँ निकल रही थी, आह्ह्ह् आईईईई. अब में उन दोनों बूब्स को दबा दबाकर एकदम लाल कर देने के बाद नीचे भाभी की चूत पर आ गया. मैंने देखा कि उनकी चूत वाह क्या मस्त साफ चमक रही थी, उस पर एक भी बाल नहीं था और वो दिखने में बड़ी ही कामुक नजर आ रही थी और चुदाई के लिए वो अब एकदम तैयार थी. अब मैंने सबसे पहले तो नीचे आते हुए भाभी की चूत को बहुत जमकर चाटा. उसके बाद सेक्सी फ़िल्मो की तरह में उनकी चूत में ज़ोर ज़ोर से अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा और भाभी अईईईईईई आह्ह्ह्हह उफफ्फ्फ्फ़ हाँ देवर जी बस आप ऐसे ही करते रहो वाह मज़ा आ गया.

फिर मैंने कुछ देर अपनी ऊँगली से चुदाई करने के बाद भाभी को घोड़ी बनने के लिए कहा तो भाभी तुरंत मेरे सामने घोड़ी बन गई, जिसकी वजह से उनके बूब्स नीचे की तरफ लटककर झूलने लगे और उनकी चूत ठीक मेरे सामने पूरी तरह से खुल गई और मैंने उनकी चूत को दोबारा कुछ मिनट चाटकर थोड़ा सा गीला कर दिया.

उसके बाद मैंने अपना लंड चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर का धक्का देकर उसके अंदर डाल दिया, जो एक ही बार में उनकी खुली हुई चूत में पूरी गहराई तक जा पहुंचा तो भाभी के मुहं से एक बड़ी ज़ोर की चीख निकल पड़ी, आईईईईइ माँ मर गई देवर जी यह कैसा दर्द दे दिया आपने मुझे ऊउईईईईईई माँ मुझे बहुत अजीब सा दर्द हो रहा है? और में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उनको चोदने लगा और वो हर एक धक्के पर हल्की सी आवाज कर रही थी और फिर कुछ देर बाद वो भी अपनी गांड को पीछे करके मेरे धक्को का जवाब देने लगी और वो मुझसे कहने लगी ऊउईईईई हाँ देवर जी ऐसे ही देते रहो धक्के आह्ह्ह्हह्ह वाह आप तो बहुत अच्छा काम करना जानते है ऊफ्फफ्फ् मुझे पहले पता होता तो में बहुत पहले ही तुमसे अपनी चुदाई के ऐसे मज़े बहुत पहले ही ले लेती, हाँ थोड़ा और ज़ोर से लगाओ धक्के, वाह मज़ा आ गया.

दोस्तों में उनके मुहं से यह बात सुनकर पूरे जोश में आ गया, जिसकी वजह से अब मेरे धक्को की गति कभी कम तो कभी ज्यादा होती रही और इस तरह से मैंने करीब 30 मिनट तक भाभी को लगातार अलग अलग तरह से चोदा मैंने उनको सोफे पर भी चोदा अब में उनकी इस चुदाई से बहुत ज्यादा थक गया था और मैंने उनके कहने पर अपना पूरा गरम गरम लावा मतलब अपना वीर्य उनके मुहं में निकाल दिया जिसको उन्होंने बड़े मज़े लेकर गटक लिया. अब भाभी मुझसे बोली कि तुमने तो आज मेरे बहुत मज़े ले लिए मेरे आकर्षक फिगर बूब्स को तुमने चूसे चाटे और मसल मसलकर लटका दिए और अब उनको खाली भी कर दिया.

अब मेरी बारी है तुम्हे मज़े देने की और आगे का काम अब में करूंगी. फिर में नीचे लेट गया मेरे लेटते ही भाभी तुरंत मेरे ऊपर चड़ गई और वो मेरी छाती को मसलने और चूसने लगी और उन्होंने दबाकर चूसकर मेरे भी निप्पल खड़े कर दिए और में भी भाभी के झूलते हुए बड़े मस्त बूब्स को ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था.

फिर उसके बाद भाभी अब मेरे लंड को पकड़कर कुछ देर सहलाने के बाद मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और करीब 15 मिनट तक उन्होंने मेरे लंड को बड़े मज़े लेकर चूसा, जिसकी वजह से में झड़ गया और मेरे वीर्य को वो चाट गई और पूरा गटक गई. अब हम दोनों को नींद आ रही थी इसलिए हम उसी तरफ बिना कपड़ो के सो गए और हम दोनों को बहुत अच्छी नींद आई और फिर सुबह उठकर हम दोनों एक साथ ही बाथरूम में जाकर टब में नहाए और उस समय मैंने भाभी के हर एक अंग को रगड़ रगड़कर उनको नहलाया और उन्होंने मुझे नहलाया और इसके बाद भी हम दो तीन दिन तक लगातार हर कभी सेक्स का आनंद लेते रहे और अब भी जब कभी हमें सही मौका मिलता है तो हम शुरू हो जाते है.