भाभी की शादीशुदा बहन की सील तोड़ी

हैल्लो दोस्तों, में मोहन एक बार फिर से आप लोगों के सामने अपनी एक आपबीती लेकर आया हूँ. में सबसे पहले तो आप सब चूत वालियों और लंड वालों को मेरा नमस्कार. मेरे बारे में तो आप सब जानते ही है, वैसे मेरे लंड का साईज 9 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है और ये कहानी मेरी और मेरे भाई की साली की है. उस समय में बी.ए फाइनल ईयर में पढ़ता था और में अपने भाई और भाभी के पास अपनी छुट्टियाँ बिताने गया हुआ था और भाई और भाभी अपनी ड्यूटी पर गये हुए थे, तो उनके जाने के बाद भाभी की बहन आ गयी.

मैंने उसको पानी दिया और चाय दी और फिर हम बैठकर बातें करने लगे. अब वो बहुत दुखी लग रही थी, अब में आपको जरा भाभी की बहन के बारे में भी बता दूँ. उनका नाम शालू है और एकदम मस्त शरीर वाली 36-30-36 की थी. उसकी हाईट 5 फुट 5 इंच, वो एकदम स्वर्ग की अप्सरा के समान खूबसूरत थी, वो उस समय 23 साल की थी और 2 साल पहले उसकी शादी हुई थी.

फिर उसने बताया कि उसको बच्चा नहीं होने के कारण उसकी सास ने लड़ झगड़कर उसको मायके भेज दिया और तलाक का नोटीस भेज दिया है इसलिए वो बहुत ही उदास लग रही थी. अब हर समय तलाक की चिंता और अंदर सेक्स की आग. फिर उसके बाद मैंने अचानक से पूछा कि शालू तेरी प्रोब्लम क्या है? तो उसने कहा कि बच्चा नहीं होने के कारण वो लोग मुझे तलाक दे रहे है, तो मैंने पूछा कि बच्चा क्यों नहीं हो रहा है? तुम डॉक्टर को दिखाओ, तो उसने बताया कि मुझमें कोई खराबी नहीं है और मोहन तुम ही बताओ कि बच्चा क्या उंगली से होगा? वो कुछ करते ही नहीं है और करना चाहते है तो भी नहीं होता है.

मैंने कहा कि तब तलाक लेकर आप दूसरी शादी कर लो, तो वो बोली कि मोहन जी एक तो मेरे पिताजी की मेरी दूसरी शादी करने की हैसियत नहीं है और दूसरी बात में उनसे बदला लेना चाहती हूँ क्योंकि उन्होंने जानबूझकर एक कुंवारी लड़की की जिंदगी क्यों बर्बाद की? तो में बोला कि बात तो ठीक है, लेकिन ये तो तभी होगा जब वो तुझे ले जाएँगे और बिना बच्चा हुए, तो वो ले नहीं जाएँगे.

फिर इतना सुनकर वो बेबसी से मजबूर होकर रोने लगी और बोली कि मेरी तो तकदीर ही खराब है मोहन जी, अब मुझे कोई रास्ता नहीं दिख रहा है, में आख़िर में जहर खाकर अपनी जान दे दूँगी. फिर में उसे सांत्वना देने के लिए अपनी बाहों में लेकर पुचकारने लगा और चुप कराने की कोशिश करने लगा.

वो आवेश में आकर और ज़ोर से लिपट गयी और बोली कि मोहन जी एक बात कहूँ तो में बोला कि हाँ कहो, तो वो कहने लगी कि आज मुझे सच में आपकी जरूरत है, अब मुझे मेरी मुसीबत को हल करने का एक यही रास्ता दिख रहा है कि आप मुझे एक बच्चा दे दो.

फिर में बोला कि तू पागल है, ये कैसे हो सकता है? आख़िर तुम मेरे भाई की साली लगती हो और वो बोली कि मोहन जी ये बात हिम्मत करके इतना खुलकर मैंने आपको कह दी, लेकिन हर किसी से तो नहीं कह सकती ना और फिर में किससे संबध करूँ? में घर से बाहर के आदमी से करूँगी तो बहुत बदनामी होगी, मोहन जी तुम्हें ये काम करना ही होगा, ये मेरी जिंदगी का सवाल है, नहीं तो में सचमुच जहर खा लूँगी और ऐसे कहकर वो और ज़ोर से रोने लगी.

मैंने घबराकर उसे चुप कराने के लिए ज़ोर से अपने से लिपटा लिया और उसकी पीठ और बाल सहलाकर उसका माथा चूमने लगा और यही पर गजब हो गया. अब वो बुरी तरह से मुझसे लिपट गयी थी और मुझे पागलों की तरह मुँह पर, गालों पर, होंठो को चूमने लगी और खूब कसकर लिपटकर मेरे सीने में अपना सिर छुपा लिया था. अब गर्म-गर्म चुम्मे लेने से मेरा लंड खड़ा हो गया था, आख़िर में भी तो जवान था.

फिर उसने मेरी पीठ पर अपना एक हाथ सहलाते हुए अपना दूसरा हाथ धीरे-धीरे आगे से ले जाकर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे मसलने लगी. उस समय में लुंगी में था और उसके नीचे अंडरवेयर भी नहीं था. फिर उसने मेरी लुंगी के अंदर अपना एक हाथ डालकर मेरे लंड को बाहर निकाला. अब मेरा मोटा तगड़ा लंड देखकर उसकी आँखों में अजीब सी चमक आ गयी थी.

उसने अचानक से नीचे झुककर मेरे लंड को चूम लिया, तो मेरा लंड एकदम से फनफना उठा और लोहे की तरह खड़ा हो गया. फिर वो मेरे कान में बोली कि मोहन जी अब मत तड़पाओ, जल्दी से आ जाओ, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. अब में भी पूरा गर्म हो चुका था तो में उसको अपने भाई-भाभी के बेड पर ले गया और पहले उसकी साड़ी उतारी, फिर उसका ब्लाउज भी उतार दिया. फिर उसकी ब्रा के खोलते ही वो थोड़ी शरमाई और उसने अपनी चूची पर अपने दोनों हाथ रख लिए.

फिर मैंने उसके हाथ हटाकर उसकी चूची को अपने मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे उसके निपल को चूसने लगा, वॉववववव क्या मस्त चूची थी? ऐसा लगता था उसके साले गांडू पति ने कभी चूसी ही नहीं थी. अब उसकी 36 साईज की चूची संतरे की तरह खड़ी और गुदगुदी थी. फिर थोड़ी देर चूसते ही उसकी सारी शर्म भाग गयी और वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगी हाए मोहन जी जल्दी कीजिए, हाईईईईईई में मर जाऊंगी, अब उसकी आँखे मस्ती से लाल हो गयी थी.

उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया तो मैंने तुरंत उसके पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसके पेटीकोट को निकालने लगा, तो वो शर्म से पलट गयी. फिर मैंने खींचकर उसका पेटीकोट उसकी टांगो से निकाल दिया और अपनी लुंगी भी खोलकर फेंक दी, अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे. फिर मैंने उसकी चूत पर चुम्मा लिया, तो वो सीधी हो गयी. फिर मैंने उसकी टाँगे चौड़ी करके उसकी चूत पर अपने होंठ रखकर उसकी चूत का दाना चूसने लगा.

अब तक मैंने जितनी भी चूत चोदी है सबको पहले चाटकर तैयार करता हूँ, क्योंकि एक तो चूत चाटने से लड़की पूरी गर्म होकर साथ में झड़ जाती है और दूसरी बात उस मर्द की दीवानी हो जाती है. अब उसकी चूत चाटते ही वो पूरी तरह से पागल हो गयी थी और मेरे सिर के बाल पकड़कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया था. अब उसकी चूत से बहुत रस टपक रहा था और बहुत सारा तो में पी गया था, बहुत मस्त खुशबूदार चूत थी उसकी.

अब उसकी चूत की ख़ुशबू लेते ही मेरा लंड और खड़ा हो गया था. फिर मैंने मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पर रखा, तो उसका पूरा बदन कांपने लगा और बोली कि जल्दी से घुसा दीजिए मोहन जी. अब उसकी चूत तो चाटने से और चूत के रस की वजह से पूरी गीली थी, लेकिन फिर भी मैंने अपने हाथ में थूक लेकर मेरे लंड पर और लगा लिया और उसकी चूत के छेद में सटाकर एक धक्का मारा तो मेरा लंड फिसलकर पूरा अंदर चला गया. फिर वो एकदम से चिल्लाई आआआआहह और उसने उसका शरीर कड़क कर लिया.

अब में उसके ऊपर लेट गया था और उसके होंठो को अपने मुँह में लेकर अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी थी, तो वो भी मेरी जीभ को चूसने लगी थी. फिर 1 मिनट के बाद मैंने थोड़ा ऊपर होकर दूसरा तेज धक्का लगाया, क्योंकि मेरा लंड इतना खड़ा हो गया था कि उसका रूकना मुश्किल था. अब तेज धक्के से मेरा आधे से ज़्यादा लंड झटके से अंदर तो चला गया था, लेकिन वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई हाईईईईई में मर गयी, मोहन जी धीरे, अरे निकालिए, में मर गयी, आआआअ, लेकिन मैंने पैरो में कैची डाल रखी थी, तो वो मेरा लंड तो नहीं निकाल पाई, लेकिन कसमसाती रही.

मैंने चुम्मा लेकर उसे पुचकारा और बोला कि क्या हुआ? थोड़ा और है बस, तो वो बोली कि मोहन जी पहली बार है ना इसलिए थोड़ा धीरे-धीरे कीजिए ना. तो मुझे हैरानी हुई और बोला कि क्या मतलब? तो वो बोली कि मोहन जी में आज तक कुंवारी हूँ, क्योंकि उनका लंड खड़ा ही नहीं होता था और कभी थोड़ा बहुत हुआ भी तो बाहर ही झड़ जाता था तो अंदर जाने की तो नौबत ही नहीं आई.

फिर मैंने चुम्मा चाटी और बातों में उलझाकर मौका देखकर एक आख़री जोर का धक्का मार दिया तो मेरा लंड उसकी कुंवारी कच्ची चूत को फाड़ता हुआ पूरा का पूरा घुसकर उसकी बच्चेदानी में लग गया. तो वो बहुत तड़पी, लेकिन में सावधान था और उसको कसकर दबोच लिया था और उसको अपने लंड को बाहर नहीं निकालने दिया था.

अब इतनी उम्र और पूरी औरत होने के बावजूद वो दर्द से रोने लगी थी. फिर मैंने उसके पूरे चेहरे पर चूमा, चूची चूसी और अपने एक हाथ से उसके चूतड़ सहलाए, तो तब उसको थोड़ा आराम मिला. फिर करीब 5 मिनट के बाद मैंने उससे पूछा कि दर्द कम हुआ, तो वो बोली कि हाँ अब थोड़ा कम है. फिर मैंने धीरे से अपने लंड को बाहर करके हल्के-हल्के धक्के लगाने चालू किए, तो धीरे-धीरे उसको भी दर्द की जगह मज़ा आने लगा तो वो बोली कि थोड़ा ज़ोर से धक्का लगाइए.

फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और लास्ट में पूरा जोर लगाकर उसको चोदना चालू किया. अब वो अपनी दोनों टाँगे ऊपर करके चुदवाने लगी थी और पागलों की तरह बोल रही थी हाए मोहन जी आज पूरा दिन कसकर चोद दो, हाईईईईईईईईईईई अब में आपकी हो गयी हूँ, आज से में आपकी हूँ मोहन जी, मेरे पेट में आज ही अपना बच्चा डाल दो, हाईईईई और ज़ोर-ज़ोर से चोदो और ऐसे कहते हुए वो झटके से मुझसे लिपट गयी और अपने मुँह से आवाजे निकालने लगी हाईईईईई मोहन जी में मररररर गयी, हाईइईईईईई, आहह और फिर वो पूरी तरह से जिंदगी में पहली बार झड़ गयी. अब उसकी चूत इतनी गर्म हो गयी थी कि 4-5 ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने के बाद में भी झड़ गया और उसकी चूत को अपने वीर्य से पूरा भर दिया.

अब वो खूब कसकर मुझसे लिपट गयी थी और मेरे कान में बोली कि मोहन जी अभी बाहर मत निकालना बच्चा होने के लिए आपका पूरा पानी बच्चेदानी में जाना जरूरी है. तो में उसकी चूत में अपना लंड डाले उसके ऊपर ही लेट गया और उसे चूमने लगा और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत को टटोल कर देखा तो मेरे हाथ में खून लग गया तो मुझे फिर से हैरानी हुई.

फिर वो बोली कि मोहन जी अब तो आपको विश्वास हो गया ना, मैंने आपको बिना चुदी चूत दी है. फिर में बोला कि हाँ शालू आज से तू मेरी जान है, तू मेरी रानी है, क्योंकि तूने अपना कुंवारा शरीर मुझे अर्पण किया है, तो वो भी खुश हो गयी. फिर 15-20 मिनट के बाद में उसके ऊपर से उठा और अब उसकी चूत ने मेरा सारा पानी अपने अंदर सोख लिया था और फिर थोड़ा बहुत बाहर आया, तो उसमें पूरा खून लगा था.

फिर मैंने उससे कहा कि हम दोनों भाइयों ने तुम दोनों बहनों को एक बेड पर ही औरत बना दिया है और उससे कहा कि तेरी बहन का खून भी इसी चादर पर लगा था, तो वो हँसने लगी और बोली कि ये सब बहुत अच्छा हुआ और नीचे चादर पर भी खून लग गया था. फिर उसने मेरे लंड को साफ करके चुम्मा लिया और फिर अपनी चूत भी साफ की.

अब वो कहने लगी थी कि मोहन जी आज आपने मुझे आख़िर औरत बना ही दिया, तो मैंने कहा कि नहीं आप अभी पूरी तरह से औरत नहीं बनी हो, तो वो कहने लगी कि क्यों? अब औरत बनने में क्या रह गया? तो में उसके कूल्हों को सहलाता– सहलाता उसकी गांड में अपनी एक उंगली डालकर कहने लगा कि अभी आपकी गांड कुँवारी है, जब इसके अंदर लंड चला जाएगा और आपकी गांड चुद जाएगी तो तब आप पूरी औरत बनोगी, अभी तो आप आधी ही औरत बनी हो.

फिर वो मना करने लगी, लेकिन अब में कहाँ मानने वाला था? तो फिर मैंने उसको पेट के बल उल्टा लेटाकर उसकी गांड में थूक लगाकर उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रख दिया और धीरे- धीरे धक्के लगाकर अपना पूरा लंड उसकी गांड में घुसा दिया. वो दर्द से करहाने लगी और रोने लगी, लेकिन में कुछ देर तक उसके ऊपर ही लेटा रहा और 5 मिनट के बाद उसकी गांड की चुदाई शुरू कर दी.

फिर उसने भी अपनी गांड उछाल-उछालकर अपनी गांड चुदवाई और फिर उस दिन उस बेड पर मैंने उसको 5 बार चोदा और शाम को 4 बजे तक हम दोनों ऐसे ही नंगे ही लिपटे रहे. फिर उसके बाद तो मैंने उसे लगभग 3 साल तक चोदकर 2 बच्चे पैदा किए, उसको पहली बार में ही गर्भ (पेट) रह गया था, तो उसके पति को एक रात के लिए किसी बहाने से बुलाया, तो वो कर तो कुछ नहीं पाया, लेकिन जब उसे पता चला कि वो गर्भवती हो गयी है, तो वो खुशी से उसे अपने घर ले गया, शायद उसे अपनी कमज़ोरी का पता था, उसे ये भी अच्छी तरह से पता था कि ये बच्चा उसका नहीं है फिर भी इसलिए चुप रहा.

अब वो अपनी ससुराल में खुश है और उसने अपना इलाज भी करा लिया है, उसे पक्का तो नहीं मालूम, लेकिन शक पूरा है कि यह दोनों बच्चे मेरे है और इसका कारण यह है कि उन दोनों बच्चो की शक्ल मुझसे मिलती है. अब दिक्कत ये है कि वो मुझे अपने यहाँ आने नहीं देता है और शालू को भी नहीं भेजता है.