अनुराधा चौंक पड़ी

desi sex kahani, antarvasna हैल्लो दोस्तों। में शिमला में रहता हूँ और आज में आपको अपनी कहानी बताना चाहता था और आज में आपको अपने सेक्स अनुभव के बारे में बताने जा रहा हूँ। में 32 साल का हूँ और जॉब कर रहा हूँ, मेरी हाईट 5 फुट 3 इंच है, में शरीर से स्लिम हूँ, लेकिन मेरी हाईट के समान मेरा लंड भी बहुत लंबा और बड़ा है। यह बात अभी 1 महीने भर पहले की है। मेरे घर में एक कपल रहने आया था, वो दोनों पति पत्नी थे। अंकल मिलिट्री में थे, आंटी अभी सिर्फ़ 22 साल की गोरी औरत थी और उनके बूब्स काफ़ी भरे हुए थे। उनके नितंब उनकी उम्र से ज्यादा बड़े थे, वो किसी तरह भी 22 साल की नहीं लगती थी। अभी हमारे यहाँ में और मेरी बुआ ही रहते थे, इसलिए उन्होंने हमारे यहाँ रूम किराए से लिया था। अब अंकल तो 6-7 दिन रहकर अपनी मिलिट्री अकेडमी में चले गये थे। आंटी का नाम अनुराधा था, में उनको आंटी कहता था, लेकिन वो मुझसे से छोटी होने के कारण मुझको अनुराधा दीदी कहने के लिए कहती थी।

फिर में भी उन्हें अनुराधा दीदी कहकर बुलाने लगा। वो अकेली रहती थी इसी कारण मेरी बुआ उन्हें हमारे साथ सोने के लिए कहती थी। मेरी बुआ रात को सोने की गोली खाकर सोती थी, क्योंकि वो वकील थी। फिर एक दिन खाना वगैरहा खाकर अनुराधा दीदी रोज की तरह अपने कपड़े धो रही थी। तो तभी उन्होंने मुझे आवाज दी और कहा कि मुझे एक बाल्टी पानी लाकर दो। तब मैंने जैसे ही उनके पास पानी ले जाकर दिया तो मैंने देखा कि वो पानी से भीग चुकी थी और सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में ही कपड़े धो रही थी। तो तब मैंने देखा कि उनके बूब्स उनके ब्लाउज में से साफ़ दिख रहे थे। अब मुझे उनकी चूची भी साफ-साफ दिख रही थी और उनका पेटीकोट गीला होने के कारण उनके नितंब भी बड़े- बड़े होने के कारण दिख रहे थे। अब मेरा तो दिमाग सोचने लगा था कि अगर अनुराधा दीदी मेरे सामने नंगी खड़ी हो जाए तो में तो पागल हो जाऊं। अब उधर मेरा लंड मेरी लुंगी में फंनफना रहा था।

फिर में फ़ौरन बाथरूम में जाकर मुठ मारने लगा। तभी बुआ ने आवाज दी तो तब में जैसे तैसे अपने लंड को लुंगी में दबाकर बुआ की तरफ गया। तब उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे एक काम से आज पूना जाना है, में 2-3 दिन नहीं आऊंगी, तू मुझे स्टेशन तक छोड़ दे। तब मैंने बुआ का सामान पैक करके स्टेशन पर छोड़ दिया और वापस घर लौट आया। अब शाम को में अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था, उसमें एक लड़की को एक लड़का नहाते हुए चोद रहा था। तभी मुझे अनुराधा दीदी का ख्याल आया। अब में और वो भी घर पर अकेली थी। फिर में उनके कमरे के दरवाजे के पास आया और छेद में से देखा, तो वो पलंग पर पूरी नंगी होकर अपनी चूत में खुज़ला रही थी।

अब यह सब देखकर मेरा लंड और तनकर फंनफ़ना रहा था। फिर मैंने झट से दरवाजे को खोला। तो तब अनुराधा दीदी मुझे देखकर चौंक गई और चादर ओढ़ने लगी थी। फिर में अपनी लुंगी एक तरफ फेंककर अनुराधा दीदी की तरफ बढ़ा और उनको चादर से अलग किया। तब वो बोली कि आ आनंद मेरा सेक्स शांत करा दे, जब से मेरी शादी हुई है में कोरी की कोरी हूँ, कभी कभी तुम्हारे अंकल आते है और मेरे सेक्स को बढ़ाकर वापस चले जाते है, आज तू मुझे फिर से चुदवाने के लिए तैयार कर। तब में अपनी बनियान निकालकर सिर्फ़ अंडरवेयर में अनुराधा मेरी जान बोलकर उनके बूब्स और नितंब दबाने लगा। तभी वो सिसकारियाँ भरने लगी आआआआआ, ऊऊऊऊऊ, मेरी चूत में अपनी जीभ डाल दे आनंद, तो तब मैंने वैसे ही किया। अब में उनकी चूत में अपनी जीभ डालकर उनके दाने को सहलाने लगा था। तो तब वो चिल्ला उठी और ज़ोर से चूस इस चूत को, आज मेरी सारी काम वासना शांत कर दे और फिर वो मेरे ऊपर, तो कभी में उनके ऊपर चलता रहा।

फिर करीब आधे घंटे के बाद मैंने अपनी अंडरवियर खोली। तो तब अनुराधा चौंक पड़ी और बोली कि तेरा लंड तो बहुत बड़ा है आनंद। फिर मैंने अपने लंड को थूक से गीला करके उनकी चूत पर लगाकर धीरे से एक धक्का लगाया, लेकिन वो अंदर नहीं जा रहा था और अनुराधा चीख रही थी हाईईई मार डाला, ऊऊऊऊऊऊऊऊओ, में अभी पैर फैलाती हूँ, फिर तब तू मेरी चूत चौड़ी करके अपना लंड डालना। तो तब मैंने फिर से कोशिश की और धक्का मारने लगा। फिर मेरा लंड जैसे ही अनुराधा की चूत में घुसने लगा। तो अनुराधा दर्द के मारे कराह रही थी और ऊऊऊऊऊओ फट गई, माआआआआ मेरी चूत, फाड़ डालेगा क्या? माआआआ। अब में थोड़ी देर तक अपना लंड उनकी चूत में ही रखकर उनके बूब्स चूस रहा था।

फिर थोड़ी देर के बाद में फिर से धक्के मारने लगा। तब फिर से अनुराधा करहाने लगी आआआआ, ऊऊऊऊऊऊऊऊऊओं, माआआआआआआ और फिर थोड़ी देर के बाद उनको भी मज़ा आने लगा और वो भी बोलने लगी मादरज़ाद फाड़ दे आज मेरी चूत को, ज़ोर से, ज़ोर से। अब उनके बोलने से में और ज़ोर- ज़ोर से धक्के मारने लगा था। अब मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था। अब वो भी हल्के हल्के से अपनी कमर चलाकर मुझे सहयोग दे रही थी। फिर लगभग 20 मिनट तक में यह क्रिया करता रहा, तभी वो झड़ने लगी और उनकी चूत में से पानी मेरे लंड पर चिपका और अब वो शांत हो गई थी। फिर में भी थोड़ी देर में झड़कर उनके ऊपर ही सो गया। फिर सुबह होते ही मैंने देखा कि वो मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी और फिर मैंने थोड़ी देर में ही अपना पानी उनके मुँह में झाड़ दिया। फिर वो नहाने चली गई और में भी नहाने चला गया। अब हम दोनों ये खेल मेरे बुआ के घर पर ना रहने पर पिछले 10-12 दिनों से खेल रहे है। मौका मिलने पर हम उस मौके का पूरा पूरा फायदा उठाते है।

धन्यवाद …