भैया को सुला के भाभी को चोदा

“अरे उषा भाभी कहाँ हो आपका बच्चा रो रहा हैं. देखो उसके आँखों से आंसू और नाक से गंदगी टपक रही हैं. “…उषा भाभी को चिराग ने आवाज लगाई. उषा उसके घर में ही रहती एक सेक्सी इंडियन भाभी थी. उषा की उम्र कुछ 27 साल की थी और चिराग कोलेज के तीसरे वर्ष में था. कम लोग ही जानते थे की यह बच्चा चिराग का ही था, क्यूंकि उषा आंटी उसके घर में कुछ 3 साल से रह रही थी और उसका पति सूबेदार वीरसिंह सेना में तैनात होने की वजह से लगभग पूरा साल बहार रहेता था. चिराग का चक्कर इस सेक्सी भाभी से चल गया था और वोह दोनों चुदाई के हथकंडे आजमाते रहते थे. किसीको पता ना चले इसलिए चिराग और उषा ने एक डोक्टर को पैसे दे खरीद लिया था जिसने बच्चे की डिलीवरी समय से पहले हो गई यह बहाना बताया था नहीं तो यह सेक्सी भाभी की पोल पकड़ी जाती. लेकिन चुदाई का नशा इतना गहरा होता हैं की दारु, चरस, अफीन और गांजा भी इसके आगे फीका लगे. वीरसिंह पिछले हफ्ते ही एक महीने की छुट्टियां ले के घर आया हैं. चिराग को उषा की चूत की और उषा को चिराग का लौड़ा चूसने की एक तलब लगी हैं क्यूंकि वीरसिंह के आने से वोह दोनों एक हफ्ते से चुदाई नहीं कर पाए हैं.

चिराग सीढ़िया चढ़ते उतारते उषा की एक झाँखी पाने की पूरी कोशिश कर लेता था. उसे उषा को मिलने के लिए बुलाना था, अंजली भी ससुराल गई थी वरना वोह उषा को चिराग की बात बता देती. वीरसिंह एकदम गर्ममिजाज का व्यक्ति था, हाँ उसकी चिराग से अच्छी पटती थी लेकिन उषा की लगाम वह हमेशा कस के रखता था. चिराग बेताब था. उषा भी वीरसिंह से चुदवाने में इतनी उत्सुक नहीं थी क्यूंकि यह फौजी का लौड़ा हस्तमैथुन कर कर के नाकारा हो चूका था, दो झटको में उसका वीर्य निकल जाता था और उषा को चूत की गर्मी करवटों में दबानी पड़ती थी. चिराग का भी हाल इधर ऐसा ही था, वीरसिंह की गेरहाजरी में तो वो उषा के वहाँ ही रात गुजारता था, सुबह किसीको पता ना चले वैसे वो अपने रूम चला आता था. उसने एक दो दिन तो सोते वक्त मुठ मारी लेकिन उसकी बेबसी अब हद से बढ़ने लगी थी. चिराग कुछ ना कुछ बहाने से वीरसिंह का कांटा दूर करना चाहता था.

चिराग गम भुलाने के लिए बंसीलाल के ठेके से चुपके से देसी दारु लेने के लिए चला गया, वहीँ उसको वीरसिंह की भेट हो गई. वीरसिंह ने उसे पूछा क्या लेने आये हों. चिराग ने उसे सच बता दिया. वीरसिंह ने चिराग से कहाँ घटिया देसी मत पीओ, आओ तुम्हे आज विदेशी पिलाता हूँ. वीरसिंह की बात सुन चिराग को सेक्सी उषा की चुदाई का रास्ता दिखाई दिया. दोनों बोतल ले के घर की तरफ बढ़ रहे थे की चिराग ने रास्ते में वीरसिंह से कहाँ, रुको जरा में पापा की दवाई ले लूँ. वह फट से मेडिकल में घुसा और अपने दोस्त अजित, जो मेडिकल का मालिक था, से कहा की अच्छी वाली एक नींद की दवाई दे जिसकी असर लम्बे समय तक रहेती हैं. अजित ने हंस के कहाँ बेन्चोद मरने का इरादा हैं क्या. चिराग हंस के बोला, लौड़े मरे हमारे दुश्मन, तेरे दोस्त के इतने ख़राब दिन नहीं आये हैं अभी. वीरसिंह के पास आते आते दवाई चिराग ने जेब में डाल दी थी.

पकोड़े बनाओ और पापड़ फ्राय करो, हम पिएंगे

घर आते ही वीरसिंह अपने सेना वाले अंदाज में बोला, सुनती हो पकोड़े और पापड़ लगाओ…हम लोग पिएंगे. साथ में प्याज भी काट लेना. चिराग ने सोच रहा था की कैसे इसके दारु में दवाई वाला पावडर मिलाऊं. चिराग ने वीरसिंह को कहाँ चिराग पिशाब कर के आता हूँ, मुझे पिने के वक्त बिच में उठना अच्छा नहीं लगता. वीरसिंह भी बोला, सही बात हैं आपकी, पहले आप हो लो फिर में हल्का होता हूँ. चिराग ग्लास लगता हूँ तब तक. चिराग का आइडिया काम कर गया था. चिराग बाथरूम में घुसा और जानबूझ के दो तिन मिनिट के बाद ही अंदर से निकला ताकि तब तक वो ग्लास भर चूका हों.

चिराग ने बहार आके देखा की ग्लास लग चुके थे और वीरसिंह ने तो चिराग का इन्तेजार किए बिना एकाद घूंट लगा भी ली थी. चिराग के बहार आते ही वो उठा और बाथरूम में घुसा. चिराग तुरंत दौड़ा और उसके ग्लास में पावडर डाल दिया, जल्दी से किचन में घुस के चिराग एक चम्मच ले आया और उसके आने तक को ग्लास की शराब हिला के चम्मच वापस भी रख दी. वीरसिंह आया और उसने ग्लास उठाया. चिराग ने कहाँ, क्या भैया जी चियर्स भी नहीं किया आपने. वीरसिंह बोला, यह सब चुतियापा हैं, चियर्स वियर्स…हम तो पीते हैं और पिलाते हैं. चिराग हंस पड़ा और वीरसिंह की ग्लास खत्म होने की राह देखने लगा. सेक्सी भाभी उषा ने पकोड़े आज भी उतने ही मस्त बनाये थे जितने अच्छे वह हमेशा चिराग के लिए बनाती थी. चिराग को पावडर मिलाता देख उसकी आँखे भी चमकी थी. उषा भाभी इतनी सेक्सी थी की चिराग का लंड उसके पति की हाजरी में भी उसकी सेक्सी चूत के लिए. भाभी भी एक दो बार पापड़ और पकोड़े रखने के बहाने रूम में आई और चिराग भाभी की गांड को देखता रहा, उसे आज इसमें भी तो लंड देना था.

शराब और दवाई का नशा दोहरा असर दिखने लगा और एक साथ पूरी बोतल पिने वाला वीरसिंह तिन ग्लास में ही लुडक गया. चिराग ने उसे हिलाया लेकिन वह मस्त नींद में सर पड़ा था. चिराग ने उसे कंधे से पकड़ा और सेक्सी रखैल उषा भाभी की मदद से उसने उसे अंदर के रूम में सुलाया जहा भाभी का बेटा चिंटू पहले से सो रहा था. बहार आके चिराग ने दरवाजे की सक्कल लगा दी और वोह भाभी को लिपट कर सेक्सी तरीके से किस देने लगा. भाभी की चूत भी पानी कब का छोड़ चुकी थी उसने चिराग को लिपटे हुए उसका लंड पकड़ लिया. चिराग ने बिना एक पल गवाएँ भाभी की सलवार उतार दी, सेक्सी भाभी ने अंदर निकर नहीं पहना था इसलिए उसकी चूत चिराग के सामने खुल पड़ी.

चिराग ने भाभी का हाथ पकड़ा और वो उसे लेके किचन में आ गया. भाभी अभी भी चिराग से लिपटने लगी थी और वो उसके लंड को पकड़ रही थी. चिराग ने अपनी पेंट उतारी और भाभी को लंड के दर्शन करवा दिएँ. भाभी लौड़े को देख खुश हो उठी और उसने निचे बैठ के सीधे ही लंड को मुहं में भर लिया. भाभी बहुत ही हॉट और सेक्सी तरीके से लंड चूसने लगी और चिराग ने किचन के प्लेटफोर्म का सहारा ले लिया. भाभी के मुहं में लैंड के झटके लगने लगे और उसकी सेक्सी चुंचिया इधर से उधर हिलने लगी. चिराग से अब रहा नहीं जा रहा था. वोह मुहं से आह आह ओह ओह की आवाजें निकाल रहा था. भाभी ने खड़े होते हुए लौड़े को एक बार और पकड़ा, पूरा लंड जैसे की करंट दिया हो वैसे हिल रहा था, इसे अब चूत का गोदाम चाहिए था बस. चिराग ने भाभी को किचन का प्लेटफोर्म पकडवा के खड़ा किया. भाभी आगे की तरफ थोड़ी झुक गई और आधी डौगी स्टाइल बना ली. चिराग ने अपने लौड़े को गांड के छेद के पास से होते हुए चूत के अंदर किया और सेक्सी आवाजे अब दोनों के मुहं से निकल रही थी. किचन आह आह ओह ओह यस यस्सस की आवाज से भरने लगा और भाभी अपनी चूत में लंड की मार खाने लगी. चिराग का लौड़ा भी इस सेक्सी लम्हों की काफी दिनों से राह देख रहा था, और वोह जैसे की वायेग्रा खा के आया हो वैसे झटको पर झटके लगाता ही गया. भाभी की चूत पांच मिनिट की चुदाई में झाग निकालने लगी और यह झाग लंड के उपर भी दिखने लगा था.

चिराग ने चूत की पंपिंग बंध की और अपना लंड चूत से बहार निकाला, लंड के ऊपर चूत से निकला झाग लगा था. चिराग के इशारा करते ही भाभी फर्श के ऊपर डौगी स्टाइल में उलटी हो गई. चिराग ने सही सेटिंग कर के अपना लंड भाभी की गांड पर रखा और धीमे धीमे करते हुए पूरा अंदर कर दिया. कुछ ही देर में फिर से आह आह ओह ओह चालू हुआ जो करीबन 5 मिनिट तक चलता रहा. भाभी की गांड के उपर ही चिराग ने अपने वीर्य को छिड़क दिया. भाभी ने वीर्य को अपने हाथ से कुलो पर फैला दिया. चिराग ने कपडे पहने और वोह घर की और चल दीया. उसकी सेक्सी ख्वाहिशें कुछ हद तक शांत हो चुकी थी. दुसरे दिन चिराग खुद वीरसिंह को मिलने आया और जानबूझ के उसे कहने लगा या आप तो कल लेट ही गएँ. मुझे ग्लास अकेले खाली करना पड़ा. वीरसिंह ने उसे कहाँ, यार ऐसा पहले कभी नहीं हुआ..मैं एक बोतल पूरी गटक जाता हूँ…..चिराग मन में बोला…भोसड़ी के उसके अंदर नींद की गोली नहीं होती हैं…….!!!

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